)
Saudi Arabia Offer To Houthis: दशकों तक खाड़ी क्षेत्र में एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे सऊदी अरब और ईरान बातचीत के लिए आमने-सामने आए हैं. इसकी वजह केवल क्षेत्र में शांति की अपील नहीं है, बल्कि अपने आर्थिक भविष्य को बचाना है. सामने आई कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान की ईरान की अचानक यात्रा का मकसद हूती विद्रोहियों के साथ युद्धविराम समझौता कराना था.
युद्धविराम समझौते के तहत सऊदी अरब तेहरान के रास्ते ईरान समर्थित इस समूह को 1 अरब डॉलर ट्रांसफर करेगा. इजरायली रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिन सलमान यह धनराशि अपने साथ मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट में ही लेकर आए थे. बताया जा रहा है कि यह बैठक मक्का डिफेंस पैक्ट में सऊदी अरब के साझेदारों की ओर से आयोजित की गई थी.
इजरायली न्यूज मीडिया 'इजरायल हयोम' की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान की ईरान यात्रा का मकसद यमन के हूती विद्रोहियों के साथ युद्धविराम समझौता करना था.

इस समझौते के तहत सऊदी अरब तेहरान के जरिए ईरान समर्थित इस समूह को 1 अरब डॉलर देगा. रिपोर्ट के मुताबिक, राजनयिक सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्री तेहरान में यह रकम अपने साथ लेकर पहुंचे थे.
सूत्रों में से एक ने बताया कि सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच का विवाद 3 साल पहले हुए समझौतों को लागू करने से जुड़ा है. इन समझौतों के तहत, सऊदी को शांति समझौता कराने की कोशिशों के हिस्से के रूप में हूती विद्रोही समूह को सीधे आर्थिक मदद देनी थी.

इस फंड का इस्तेमाल अन्य चीजों के अलावा, हूथी नियंत्रण वाले इलाकों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने और आम नागरिकों के इन्फ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण के लिए किया जाना था. इसके बदले हूती विद्रोहियों को युद्धविराम का पालन करना था और सऊदी अरब पर अपने हमले रोकने थे.
बता दें कि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में एयरपोर्ट्स और खासतौर से ऑयल फैसिलिटी पर हमले किए हैं, जिससे देश को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. वहीं दूसरी ओर होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों पर ईरानी हमलों ने खाड़ी देशों से ऑयल एक्सपोर्ट को ब्लॉक कर दिया है.
हूती ने हाल के महीनों में अपने हमलों को यह कहते हुए सही ठहराया है कि सऊदी अरब उन समझौतों से मुकर गया है. ईरान भी अमेरिका के साथ चल रहे अपने संघर्ष के चलते हूती विद्रोहियों को हथियार सप्लाई करने के साथ अन्य तरीकों से मदद पहुंचा रहा है. ऐसे में तेहरान में हुई यह बैठक सऊदी अरब की निगेटिव इमेज भी बनाती है कि वह ऑयल एक्सपोर्ट को बहाल करने के लिए कुछ भी रियायतें देने को तैयार है.