)
शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा आश्विन महीने की पूर्णिमा को कहते हैं. यह साल की सबसे अहम पूर्णिमा में से एक है. शरद पूर्णिमा की रात को खुले आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा है. माना जाता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है. जिसे अगले दिन सभी प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं. जो सेहत में बेहतरी देता है, संकटों से बचाता है. साथ ही इस रात की गई पूजा-आराधना घर में समृद्धि और बरकत लाती है. शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने, पूजा-पाठ करने के अलावा पूरी रात जागने की भी परंपरा है. जिसके पीछे एक खास वजह है. इस साल 25 अक्टूबर 2026, रविवार को शरद पूर्णिमा है.
शरद पूर्णिमा को कोजागरी कहने का मतलब ही है कि कौन जाग रहा है. क्योंकि इस रात जागना अहम होता है. इसके पीछे 3 प्रमुख कारण हैं.
1. मां लक्ष्मी निकलती हैं भ्रमण: धर्म-शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर धरती पर भ्रमण करने निकलती हैं. वे अपने उन भक्तों को धन-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं जो शरद पूर्णिमा की रात जागकर उनकी पूजा, मंत्र जाप और स्मरण करता है. मान्यता है कि जो लोग सो जाते हैं, वे मां लक्ष्मी की कृपा से वंचित रह जाते हैं. इसलिए कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात सोए तो गरीब हो जाओगे, जागे तो धन मिलेगा. लिहाजा इस रात जागकर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें.
2. चंद्रमा की 16 कलाएं: शरद पूर्णिमा रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और पृथ्वी के सबसे करीब होता है. इसलिए माना जाता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें विशेष होती हैं और उनसे अमृत बरसता है. इस चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे कुछ समय बिताना मन को शीतलता और शांति देता है. कुंडली में चंद्रमा मजबूत करता है, जो कि मन, माता और भावनाओं का कारक है. इससे निर्णय क्षमता बेहतर होती है.
3. बेहतर होती है सेहत : मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात भर न सोने से और चंद्रमा की रोशनी में बिताने से सेहत बेहतर होती है. बीमारियां दूर होती हैं. अगले दिन चांदनी की रोशनी में रखी खीर खाएं.
(Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक प्रचलित कथाओं पर आधारित है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है.)