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इंडिया गठबंधन ने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है. इससे पहले राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के बाद, अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी इस पूरे मामले पर ज्ञापन सौंपने की योजना की घोषणा की है और साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी की है. वहीं, इस मामले पर बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया है.
विपक्ष देश को कर रहा बदनाम
बीजेपी नेता दीनदयाल बरनवाल ने कहा कि कांग्रेस और सभी विपक्षी दल मिलकर देश को अस्थिर करना चाहते हैं. एक तरफ जहां पूरी दुनिया में हमारे देश का नाम हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ विदेशियों के साथ मिलकर विपक्ष देश को बदनाम कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करना एक ड्रामा है जो बेहद गलत है. जब झारखंड और कर्नाटक में जीत होती है तो चुनाव आयोग गलत नहीं लगता, लेकिन जब हारते हैं तो चुनाव आयोग का दोष होता है.
'इतिहास हमसे सवाल करेगा'
मामले पर राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा ने कहा कि आज देश की जो स्थिति है, इलेक्शन कमिश्नर आफ इंडिया ने जो चीज की है, आज जनता सवालों के जवाब मांग रही है. पक्ष इलेक्शन कमीशन को देना चाहिए, भारतीय जनता पार्टी जवाब दे रही है. हम अगर चुप रहे, तो इतिहास हमसे सवाल करेगा. इसीलिए लोकतांत्रिक नींव के सवाल पर हम आज प्रदर्शन कर रहे हैं.
'दाल में बहुत कुछ काला है'
वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) भी इलेक्शन कमीशन और भारतीय जनता पार्टी पर हमलावर है. विनोद पांडे ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके नाम पर जो वोट काटे गए उसका विरोध तो होगा. यह विरोध सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं, आम आदमी भी कर रहा है. सवाल चुनाव आयोग से हैं और जवाब भारतीय जनता पार्टी दे रही है. यह स्पष्ट करता है कि दाल में बहुत कुछ काला है.
रिपोर्ट: कामरान जलीली