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CBSE Three Language Policy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6वीं के छात्रों के हित में बड़ा निर्देश जारी किया है. शीर्ष अदालत ने बोर्ड को निर्देश दिया है कि कक्षा 6वीं के विद्यार्थियों को भी वही राहत दी जाए, जो पहले कक्षा 7वीं के छात्रों को दी गई थी. दरअसल, CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है. इससे पहले भी अदालत ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र में इस नीति से छात्रों और अभिभावकों पर पड़ने वाले दबाव पर चिंता जताई थी और इसके इम्प्लांटेशनमें राहत देने की बात कही थी.
सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6वीं के छात्रों के लिए राहत भरा निर्देश जारी किया, लेकिन सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने इस छूट पर असहमति जताई थी. सरकार का रुख था कि इस शैक्षणिक सत्र में 6वीं के छात्रों को छूट न दी जाए. सरकार की ओर से दलील दी गई कि लगभग 99 प्रतिशत सीबीएसई स्कूल तीन-भाषा नीति को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और ज्यादातर छात्र इसे अपना चुके हैं. हालांकि, केंद्र सरकार की इस दलील के बावजूद कोर्ट ने छात्रों पर अचानक पड़ने वाले दबाव को देखते हुए मौजूदा सत्र में कक्षा 6वीं के विद्यार्थियों को भी राहत देने का निर्देश जारी किया.
जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले 17 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से कक्षा 6 में तीन-भाषा नीति को लागू करने की समयसीमा पर पुनर्विचार करने को कहा था. अदालत ने बोर्ड को इस नीति के अनिवार्य क्रियान्वयन को जनवरी 2027 से लागू करने की संभावना पर विचार करने का सुझाव दिया था. साथ ही, मौजूदा शैक्षणिक सत्र के कक्षा 6 के छात्रों को इस दौरान तीसरी भाषा ऑप्शनली पढ़ने की अनुमति देने की बात कही थी.
सीबीएसई ने इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत कक्षा 6वीं के सिलेबस में तीन-भाषा नीति लागू करने का ऐलान किया था. इस नीति के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी अनिवार्य हैं, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी और तीसरी भाषा के तौर पर किसी अन्य भारतीय या विदेशी भाषा का विकल्प दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद, अब मौजूदा सत्र में कक्षा 6वीं के छात्रों को भी वही राहत मिलेगी जो कक्षा 7वीं के छात्रों को मिली थी. इसका मतलब ये है कि इस साल पढ़ाई कर रहे छात्रों पर अचानक नई भाषा चुनने या परीक्षा देने का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा और वो इसे ऑप्शनली या अगली कक्षा से अपना सकेंगे.