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HR Job and Career Guidance: कभी सोचा है कि जो कंपनी में सबकी हायरिंग करते हैं, आखिर उनका इंटरव्यू कौन लेता होगा? सैलरी पैकेज तय करने से लेकर जॉइनिंग लेटर थमाने वाले HR खुद किसी कंपनी में कैसे सिलेक्ट होते हैं? सीनियर HR से लेकर जूनियर एचआर तक का सिलेक्शन प्रोसेस क्या होता है? क्या एचआर बनने के लिए MBA करना ही एकमात्र रास्ता है या बिना एमबीए के भी ये जॉब मिल सकती है? अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं, तो आइए HR करियर से जुड़े इन सभी सवालों के सटीक जवाब जानते हैं.
किसी भी कंपनी में ह्यूमन रिसोर्सेज यानी एचआर डिपार्टमेंट रीढ़ की हड्डी की तरह काम करता है, जिसका मुख्य काम सिर्फ हायरिंग करना नहीं, बल्कि कंपनी और कर्मचारियों के बीच संतुलन बनाए रखना होता है. मुख्य तौर पर एक एचआर की जिम्मेदारियां कर्मचारियों की भर्ती और चयन है. सही उम्मीदवार का इंटरव्यू लेना, सैलरी नेगोशिएट करना और जॉइनिंग करना. इसके अलावा ऑफिस के माहौल को बेहतर बनाए रखना और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना भी है. एचआर, पेरोल और नीतियां जैसे- सैलरी, लीव और कंपनी की पॉलिसी भी मैनेज करता है.
प्राइवेट कंपनियों में एचआर की हायरिंग किसी एक तय परीक्षा से नहीं, बल्कि पद और जरूरत के हिसाब से होती है. भारत सरकार का राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) भी एचआर क्षेत्र में करियर के लिए 'रिक्रूटमेंट एग्जीक्यूटिव' और 'पेरोल एंड एम्प्लॉयी डेटा मैनेजमेंट' जैसे स्पेसिफिक जॉब रोल्स को मान्यता देता है.
एचआर में करियर शुरू करने के लिए सबसे जरूरी है ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करना. ऐसे छात्र जिन्होंने बिजनेस, मनोविज्ञान, एचआर या उससे संबंधित सब्जेक्ट की पढ़ाई की है को वो एचआर करियर शुरू करने के लिए एक बेहतर तरीका है. हालांकि, सभी कंपनियों में एचआर योग्यता अलग-अलग होती है. विभिन्न डिग्री के योग्यता वालों को एचआर की नौकरी मिल सकती है.
एचआर की नौकरी हासिल करने के लिए जिस उम्मीदवार का नाम शॉर्टलिस्ट होता है, उससे कम्युनिकेशन स्किल, किसी समस्या का हल निकालने का तरीका, लोगों के साथ काम करने की क्वालिटी, नॉलेज से लेकर स्वभाव आदि देखा जाता है. एचआर से इंटरव्यू के दौरान एक मुख्य सवाल ये भी पूछा जाता है कि वो किसी उम्मीदवार को कंपनी में रखने के लिए कैसे शॉर्टलिस्ट करेगा. कैसे इंटरव्यू लेगा और भर्ती प्रक्रिया के दौरान कैसे जिम्मेदारी को संभालेंगे?
कुछ कंपनी एचआर हायरिंग की प्रक्रिया के दौरान लिखित परीक्षा का भी आयोजन करती हैं. टेस्ट देने के बाद योग्य उम्मीदवारों को सिलेक्ट किया जाता है. टेस्ट या असाइनमेंट के माध्यम से कंपनी उम्मीदवार की क्षमता को चेक करती है. इसके आधार पर कंपनी एचआर की हायरिंग करती है.
एचआर करियर को लेकर एक मिथ ये फैला हुआ है कि बिना एमबीए किए एचआर की नौकरी नहीं मिलती है. हालांकि, ऐसा नहीं है कि सिर्फ एमबीए करने वालों को ही एचआर की जॉब मिलती है. आमतौर पर ये कंपनी के ऊपर निर्भर करता है. वहां पर किस पद पर वैकेंसी है ये भी जरूरी है. एचआर की एंट्री लेवल पोस्ट के लिए ग्रेजुएशन की डिग्री होना जरूरी है. जबकि, एचआर मैनेजर पद के लिए योग्यता अधिक मांगी जा सकती है. मास्टर या पीएचडी डिग्री वालों को एचआर मैनेजर की जॉब मिल सकती है. हालांकि, कई बार काम करते-करते हासिल किए गए अनुभव के बाद भी एचआर की सीनियर पोस्ट मिल सकती है.