)
बिहार राजस्व और भूमि सुधार विभाग ने 7 अक्टूबर, 2026 दिन बुधवार को मुजफ्फरपुर जिले में बड़ी कार्रवाई की है. विभाग ने जिले के मुशहरी अंचल में तैनात अंचलाधिकारी (CO) महेंद्र कुमार शुक्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. दाखिल-खारिज के मामलों में लगातार मिल रही शिकायतों, सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी और भू-माफियाओं के साथ साठगांठ की पुष्टि होने के बाद विभागीय अनुशासनिक प्राधिकार ने यह सख्त एक्शन लिया है.
जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा
विभागीय अनुशासनिक प्राधिकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, निलंबन की इस अवधि के दौरान उनका मुख्यालय सारण प्रमंडल आयुक्त का कार्यालय छपरा तय किया गया है. नियम के तहत निलंबन अवधि में उन्हें सिर्फ जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा.
महीनों अटकाईं फाइलें, दस्तावेजों में छेड़छाड़ की पुष्टि
दरअसल, सरकारी जांच में सीओ महेंद्र कुमार शुक्ला के कामकाज को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. जैसे दाखिल-खारिज के एक साधारण से आवेदन को बिना किसी जायज वजह के पूरे 140 दिनों तक लटका कर रखा गया. साथ ही दाखिल-खारिज से जुड़े केस में सरकारी अभिलेखों और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने की शिकायत मिली थी, जो शुरुआती जांच में बिल्कुल सही पाई गई. आरोप है कि सीओ ने भू-माफियाओं से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भी दाखिल-खारिज के मामलों को निपटाया और प्रक्रिया में खुलकर पक्षपात किया.
विभागीय योजनाओं में भी भारी लापरवाही
जांच रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि शुक्ला केवल दाखिल-खारिज में ही नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ी सरकार की कई बेहद महत्वाकांक्षी योजनाओं में भी घोर लापरवाही बरत रहे थे. दाखिल-खारिज के अलावा परिमार्जन प्लस, एलपीसी (LPC), अभियान बसेरा-2 और आधार सीडिंग जैसे जनहित के कामों में उनकी ओर से भारी सुस्ती और अनदेखी देखी गई.
जब विभाग ने पूरे मामले पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा, तो उन्होंने समय पर कोई जवाब नहीं दिया. इसके अलावा वे विभागीय जांच की प्रक्रिया में भी सहयोग करने से बचते रहे. मुशहरी CO महेंद्र कुमार शुक्ला पर ये भी आरोप है कि वह सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत मांगी गई जानकारियों को भी समय पर उपलब्ध नहीं करा रहे थे.
रिपोर्ट: प्रिंस कुमार कुशवाहा