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पटना के मनेर में मूर्ति विसर्जन के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया. सोन नदी की सोती में डूबने से एक युवक की मौत हो गई. मृतक की पहचान मनेर नगर परिषद के वार्ड नंबर-1 स्थित नेवाती मोहल्ला निवासी संजीत कुमार के रूप में हुई है. घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था से लेकर विसर्जन घाट पर सुरक्षा इंतजामों तक पर सवाल उठ रहे हैं. परिजनों का आरोप है कि युवक की जान बचाने के लिए उन्हें अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन समय पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनेर से एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली.
दरअसल, मूर्ति विसर्जन के दौरान संजीत कुमार सोन नदी की सोती में डूबने लगा. युवक को डूबता देख आसपास मौजूद लोगों ने नदी में छलांग लगाई और किसी तरह उसे बाहर निकाला. इसके बाद आनन-फानन में उसे मनेर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए रेफर कर दिया. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में दो-दो एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद उसे दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं दी गई. ऐसे में परिजन और स्थानीय लोग बाइक से ही उसे लेकर अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे.
इसी बीच घटना की जानकारी मनेर पुलिस को मिली. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए संजीत कुमार को अपनी गाड़ी से बिहटा स्थित ईएसआईसी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. परिजनों का आरोप है कि शव को घर ले जाने के लिए भी अस्पताल की ओर से एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके बाद वे शव को बाइक से ही घर ले गए.
इस घटना के बाद मूर्ति विसर्जन के लिए चिन्हित घाट पर प्रशासनिक तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि घाट पर न तो मजिस्ट्रेट मौजूद थे, न गोताखोरों की व्यवस्था थी और न ही कोई सरकारी अधिकारी मौके पर दिखाई दिया. फिलहाल, संजीत कुमार की मौत के बाद परिजन स्वास्थ्य व्यवस्था और विसर्जन घाट पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठा रहे हैं. अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.
रिपोर्ट: इश्तियाक खान