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बिहार की राजधानी पटना में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में 4 नवंबर बुधवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. इस महत्वपूर्ण बैठक में मद्य निषेध और राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो की ओर से राज्य में नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के साथ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मिली उपलब्धियों पर चर्चा की गई.
बैठक में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 (27 अक्टूबर तक) में एनडीपीएस एक्ट के तहत कुल 4,232 मामले दर्ज किए गए हैं. 6,104 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई है, जो कि साल 2025 के कुल 2,583 मामलों और 3,562 गिरफ्तारियों की तुलना में काफी अधिक है. साल 2023 से 27 अक्टूबर 2026 तक राज्य भर में कुल 11,347 मामले दर्ज कर 13,543 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जब्त किए गए मादक पदार्थों में साल 2026 के दौरान अब तक 46,549.95 किग्रा गांजा, 149.696 किग्रा हीरोइन/ब्राउन शुगर/स्मैक, 11,56,380 नशीली गोलियां और कैप्सूल, 4,92,870 नशीले इंजेक्शन और 5,11,988 बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप (CBCS) शामिल हैं. मादक पदार्थों की बरामदगी के मामले में गांजा जब्ती में अररिया (10,573 किग्रा), सुपौल (8,813 किग्रा) और मधुबनी (4,483 किग्रा) शीर्ष जिले रहे, जबकि हीरोइन जब्ती में पटना (24.1 किग्रा) और पूर्णिया (20 किग्रा) सबसे आगे रहे.
इसके अलावा साल 2025 की तुलना में 2026 में बिहार पुलिस की तरफ से जब्त मादक पदार्थों का विनष्टीकरण लगभग 10.1 गुना बढ़कर 25,247 किग्रा तक पहुंच गया है. फसल साल 2025-26 के दौरान अवैध अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 37 मामलों में 198 अभियुक्तों पर शिकंजा कसा गया. साथ ही कुल 512.235 एकड़ अवैध अफीम की फसल नष्ट की गई, जिसमें अकेले गयाजी जिले में 508.755 एकड़ क्षेत्र शामिल है. त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए राज्य में 10 विशेष न्यायालय कार्यरत हैं. साल 2021 से अगस्त 2026 तक कुल 1,652 मामलों में 2,225 अभियुक्तों को सजा दिलाई जा चुकी है.
आदतन अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम के तहत 132 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 3 निरोध आदेश गृह विभाग की ओर से निर्गत कर तामील कराए जा चुके हैं. साथ ही व्यावसायिक मात्रा के 231 मामलों में 417 अभियुक्तों की अवैध संपत्ति की वित्तीय जांच की प्रक्रिया जारी है.
मादक पदार्थों की सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए मानस पोर्टल के माध्यम से 3,718 इनपुट प्राप्त हुए जिन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 138 प्राथमिकी दर्ज की गईं. जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 27 अक्टूबर 2026 से 26 नवंबर 2026 तक नशा मुक्त बिहार अभियान 2026 का संचालन किया जा रहा है और शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को ड्रग फ्री जोन घोषित करने के निर्देश दिए गए हैं.
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री स्तर पर निरंतर समीक्षा, जिला स्तर पर नियमित मासिक एनकॉर्ड बैठकें आयोजित करने, सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में नशामुक्ति के लिए समर्पित वार्ड बनाने और पुलिस बल के लिए विशेष प्रशिक्षण और प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए.
इसके साथ ही नशा मुक्त बिहार अभियान और शैक्षणिक संस्थानों के इर्द-गिर्द ड्रग फ्री जोन जैसी पहलों से युवाओं और छात्र वर्ग को नशे की लत से बचाने में मदद मिल रही है, जिससे आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित हो रहा है. नशामुक्ति केंद्रों और पुनर्वास योजनाओं के विस्तार से पीड़ितों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिल रहा है, जो समाज में अपराध दर को घटाने और स्वस्थ, जागरूक और सुरक्षित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
बता दें कि बैठक में पुलिस महानिदेशक, बिहार प्रीता वर्मा, प्रधान सचिव (गृह विभाग) पंकज कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था) श्री रत्न संजय, और विशेष सचिव (गृह विभाग) क्षत्रनील सिंह उपस्थित रहे.