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बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से शुरू होने जा रहा है, जो 4 दिसंबर तक चलेगा. 5 दिनों के सत्र में विधानसभा और विधान परिषद की कुल पांच बैठकें होंगी. सत्र के दौरान सरकार विधायी कार्यों को आगे बढ़ाएगी. विभिन्न विभागों से जुड़े अहम मुद्दों पर सदन में चर्चा होगी. विपक्ष जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा. नई सरकार की प्राथमिकताओं और विकास योजनाओं को लेकर चर्चा होने की संभावना है. एमएलसी चुनावों के बाद सदन में नए चेहरे भी देखने को मिलेंगे.
सोमवार (30 नवंबर) से शुक्रवार (4 दिसंबर) तक चलने वाले इस सत्र के दौरान सरकार अपने विधायी कार्यों को आगे बढ़ाएगी, विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी और कई महत्वपूर्ण विधेयकों को भी सदन के पटल पर रखा जा सकता है. बता दें कि सत्र की कार्यसूची सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किन-किन विधेयकों और विषयों पर सदन में चर्चा होने वाली है.
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए चुनावों में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से कई सीटिंग MLC को हार का सामना करना पड़ा है, जबकि कई नए उम्मीदवारों को शानदार जीत मिली है. ऐसे में यह शीतकालीन सत्र इन नव-निर्वाचित सदस्यों के लिए सदन में अपनी बात रखने का एक बड़ा और पहला अवसर साबित होने वाला है.
शीतकालीन सत्र के दौरान हंगामा होने के पूरे आसार है. क्योंकि विपक्ष सरकार को कई गंभीर मुद्दों पर घेरने की पूरी तैयारी कर रहा है. महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था जैसे जनता से जुड़े अहम विषयों पर तीखे सवाल उठने की संभावना है.
साथ ही, बाढ़ के मुद्दे पर भी विपक्ष जमकर हंगामा कर सकता है. जमुई समेत कई जिलों से लड़कियों के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, दोनों सदनों में इस पर भी चर्चा की जा सकती है.
इसके अलावा, विपक्ष विभिन्न सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को लेकर भी सरकार को घेरने की तैयारी में हैं. इससे पहले बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र 20 से 24 जुलाई तक आयोजित हुआ था, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर जोरदार टकराव देखने को मिला था.