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बेतिया में बच्चियों और महिलाओं के साथ बढ़ते अपराध ने पुलिस के कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अपराध के आंकड़े बताते हैं कि जिले में महिलाओं के लिए हेल्प डेस्क और हेल्पलाइन से जुड़े जागरूकता अभियानों का अभी तक कोई नतीजा साफ तौर पर दिखाई नहीं दे रहा है. बता दें कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए थानों में महिला हेल्प डेस्क, महिला हेल्पलाइन और आपात सहायता के लिए डायल-112 जैसी व्यवस्थाएं हैं. अब सभी थानों में चाइल्ड हेल्प डेस्क भी शुरू कर दी गई है. इसके बावजूद पुलिस जिले में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म की घटनाएं सामने आना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है.
दो वर्षीय बच्ची का अपहरण और हत्या
इस सप्ताह नगर और साठी थाना क्षेत्र में दो किशोरियों से दुष्कर्म की घटना सामने आ चुकी है. जीएमसीएच के समीप किशोरी से दुष्कर्म की घटना अभी लोगों के जेहन से उतरा भी नहीं था कि साठी में 10 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म की सूचना ने लोगों को हिला कर रख दिया. साठी थाना के बाद मझौलिया थाना अंतर्गत दो वर्षीय बच्ची का अपहरण और उसकी हत्या ने पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है. हालांकि, सभी मामले के आरोपित पकड़े जा चुके हैं.
दुष्कर्म के कई मामले आए सामने
सवाल यह है कि शिकायत के बाद कार्रवाई के साथ-साथ अपराध रोकने और महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने की व्यवस्था कितनी कारगर है. इस साल जिले के विभिन्न थाना क्षेत्र में सामने आए मामलों पर नजर डालें तो नौतन, बलथर, शिकारपुर, गौनाहा, नगर, मैनाटांड़, इनरवा और साठी थाना क्षेत्रों में महिलाओं और नाबालिगों से दुष्कर्म के कई मामले सामने आए हैं. इनमें चार साल की बच्ची से लेकर किशोरियों और वयस्क महिलाओं तक को निशाना बनाए जाने के आरोप हैं. ताजा घटना ने अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जागरूकता अभियान पर खड़े हो रहे सवाल
पुलिस का दावा है कि लड़कियों को सुरक्षित करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा है. GMCH परिसर में मां का इलाज कराने आई नाबालिग तक दुष्कर्मी कैसे पहुंच गया. सार्वजनिक संस्थानों में आने-जाने वालों की निगरानी और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा की व्यवस्था की समीक्षा क्यों नहीं हो रही है? महिला हेल्प डेस्क का उद्देश्य महिलाओं की शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ सुनना और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है.
वहीं, चाइल्ड हेल्प डेस्क बच्चों से जुड़ी शिकायतों के लिए बनाई गई है. लेकिन अपराध होने से पहले महिलाओं और बच्चियों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी केवल हेल्प डेस्क तक सीमित नहीं हो सकती. लोगों का कहना है कि पुलिस गश्ती, संवेदनशील स्थानों की निगरानी, सार्वजनिक संस्थानों में सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर भी उतनी ही जरूरी है.
हाल के महीनों में सामने आए मामले-
30 अप्रैल : बलथर थाना क्षेत्र में छठी कक्षा की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म
16 मई : शिकारपुर थाना क्षेत्र में में महिला से यौन शोषण का आरोप
30 मई : गौनाहा थाना क्षेत्र में में चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म
10 जून : नगर थाना क्षेत्र में नौ वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म
20 जून : मैनाटांड़ थाना क्षेत्र में 16 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म
26 जून : नौतन थाना क्षेत्र में युवती से यौन शोषण का आरोप
29 जून : इनरवा थाना क्षेत्र में महिला से दुष्कर्म
2 अगस्त : साठी थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप
4 अक्टूबर : नगर थाना क्षेत्र में जीएमसीएच के समीप 14 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म का आरोप
6 अक्टूबर: साठी थाना क्षेत्र में 10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म का आरोप
8 अक्टूबर : मझौलिया थाना अंतर्गत दो वर्षीय बच्ची का मिला शव
शिकायत मिलते हैं, त्वरित कार्रवाई की जाती है- बेतिया SSP
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस काफी संवेदनशील है. बेतिया एसएसपी कुमार गौतम ने बताया कि शिकायत मिलते हैं, त्वरित कार्रवाई की जाती है. जीएमसीएच के समीप हुई घटना की सूचना मिलने के चार घंटे के भीतर आरोपित को गिरफ्तार किया गया. साठी थाना अंतर्गत हुए घटना का आरोपी गिरफ्तार हुआ. मझौलिया में बच्ची के हत्या मामले में सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है. बेतिया पुलिस सजग और सतर्क है.
रिपोर्ट: धनजंय द्विवेदी