पैरेंट्स के हाथ में भी सुरक्षित नहीं है बचपन; माता पिता क्यों ले लेते हैं अपने ही जिगर के टुकड़े की जान ?
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पैरेंट्स के हाथ में भी सुरक्षित नहीं है बचपन; माता पिता क्यों ले लेते हैं अपने ही जिगर के टुकड़े की जान ?

 सूचना सेठ के अपने 4 साल के बेटे की हत्या ने पूरे देश के दिल को दहला  दिया है और एक सवाल सबके मन में खड़ा कर दिया है कि आखिर ऐसा क्या कारण दिमाग पर इतना हावी हो जाता है कि जन्म देने वाले मां-बाप अपने ही बच्चे की जान के दुश्मन बन जाते हैं.

पैरेंट्स के हाथ में भी सुरक्षित नहीं है बचपन; माता पिता क्यों ले लेते हैं अपने ही जिगर के टुकड़े की जान ?

बीते 4-5 दिनों में सूचना सेठ के नाम से पूरी दुनिया वाकिफ हो गई है. सूचना सेठ के अपने 4 साल के बेटे की कथित तौर से हत्या कर उसके शव को सूटकेस में बंद करके ले जाने के मामले ने पूरी दुनिया भर के दिलों- दिमाग को डिस्टर्ब कर दिया है. इस मामले ने दुनिया भर में एक अलग ही तरह की बहस छेड़ दी है और लोगों के ज़हन में एक सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जिंदगी देने वाली जननी कैसे अपने बच्चे की जिंदगी लेने वाली हत्यारी बन सकती है. ऐसे में एक अहम सवाल बार-बार सामने उठ कर आ रहा है कि सूचना सेठ जैसे मामले इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रहे हैं? और इन मामलों में हमारा 'एजुकेशन सिस्टम' पर सवाल क्यूं उठ रहे हैं. इससे पहले हम आपको बताएं कि इस तरह के मामलो में मनोविशेषज्ञ  की क्या राय है, पहले जान लीजिये कि हाल ही में ऐसे मामले कब-कब सामने आयें हैं.

6 अगस्त, 2023 को एक दुखद घटना में, 31 वर्षीय सॉफ्टवेयर पेशेवर वीरार्जुन विनय ने अपनी 29 वर्षीय पत्नी हेमावती सहित  दो बेटियों, मोक्ष मेघानयन (2) और आठ महीने की सृष्टि सुनयना की जान ले ली. यह भयानक घटना बेंगलुरु के टेक हब सीगेहल्ली के साई गार्डन अपार्टमेंट में घटी. उसके बाद एक मामला 28 नवंबर 2022 को सामने आया जहां बेंगलुरु पुलिस ने 45 वर्षीय एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को अपनी दो साल की बेटी की कथित हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था. आरोपी ने अपराध के पीछे वित्तीय कठिनाइयों को मुख्य कारण बताया था. इस घटना ने आर्थिक दबावों से इंसान पर होने वाले मानसिक प्रभाव पर सवाल उठाए. सूचना सेठ सहित इन सभी मामलों में नोट करने वाली यह है कि घटना को अंजाम देने वाले सभी लोग tech बैकग्राउंड वाले हैं जो tech बैकग्राउंड वालों  पर मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों के भयावह प्रभावों पर प्रकाश डाला गया है.

क्या कहते हैं इस मामले में मनोविशेषज्ञ
वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. ए. श्रीधर के अनुसार, सूचना सेठ मामले को वे अन-रिजॉल्वड ट्रॉमा और अपने पति के खिलाफ गुस्सा, हताशा और सबक न सिखा पाने की बेबसी के रिएक्शन के तौर पर देखते हैं. मनोवैज्ञानिक डॉ. ए. श्रीधर कहते हैं कि इस तरह से जीवनसाथी के हिंसक और आक्रामक व्यवहार का असर बच्चे पर भी पड़ सकता है. एक माता-पिता के रूप में, एक बार जब आप ऐसी मानसिकता में आ जाते हैं तो परिस्थितियों में प्यार और करुणा कोई मायने नहीं रखते. इसलिए इस मामले को देखते हुए, इसे एक मानसिक बीमारी कहा जा सकता है, क्योंकि उनमें आम इंसानों की तरह प्यार और सहानुभूति की भावनाएं की कमी हो जाती हैं. डॉ. ए. श्रीधर इस मुद्दे् पर आगे बात करते हुए कहते हैं कि बच्चे की जान, जाने का कारण उसकी मां का अपने पति के लिए गुस्सा था. वो गुस्सा जो वो अपने पति पर नहीं निकाल सकी उसने अपने बच्चे पर निकाल दिया. वो पत्नी तो बन गई थी लेकिन कभी मां नहीं बन सकी. क्योंकि वो अंदर से वो बच्चे के लिए इच्छुक थी ही नहीं, और उसे बच्चा मिल गया. डॉ श्रीधर ने ये भी बताया कि चाहे कोई कितना भी पढ़ा लिखा या बुद्धिमान ही क्यों न हों, हमारा एजुकेशन सिस्टम बुनियादी मानवता  नहीं सीखा सकता. किसी भी इंसान का व्यवहार छोटी उम्र में ही डेवलप हो जाती है. हमारी डिग्रीयां उन्हें छुपा  देती है. चाहे हम कहीं पढ़े लिखे हो इससे फर्क नहीं पड़ता.  

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