केस जीतने के बाद भी मरने के पहले इस वृद्ध को साबित करनी है अपनी नागरिकता
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केस जीतने के बाद भी मरने के पहले इस वृद्ध को साबित करनी है अपनी नागरिकता

Assam Citizenship: असम के कामरूप जिले के बोको इलाके में रहने वाली एक 85 साल की महिला का पूरा परिवार भारत का नागरिक है, लेकिन इस महिला को 21 साल बाद एक बार फिर अपनी नागरिका साबित करनी है. 1998 में भी उसपर विदेशी नागरिक होने का इल्जाम लगाया गया था, जिसे वह कोर्ट में गलत साबित कर मुकदमा जीत गई थी.

भानुमति बरोई

गुवाहाटीः असम में लागू नागरिकता कानून ने राज्य के ढे़र सारे लोगों को अपने ही देश में विदेशी घोषित कर दिया और वह ये साबित करने की लड़ाई लड़ रहे हैं कि वह भी भारत के ही नागरिक हैं. ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं कि एक ही परिवार के सदस्य में से किसी एक को विदेशी घोषित कर डिटेंशन कैंप में डाल दिया गया है और उसका पूरा परिवार उसे भारतीय साबित करने की कानूनी लड़ाई में उलझ गया है. ताजा मामला असम में एक 85 वर्षीय महिला का सामने आया है, जिन्हें पहले विदेशी न्यायाधिकरण अदालत ने भारतीय घोषित किया था, लेकिन उसे एक बार फिर अपनी नागरिकता साबित करने के लिए नोटिस भेजा गया है. महिला को अब खुद को साबित करना है कि वह इसी मुल्क में पैदा हुई नागरिक है, ताकि मरने के बाद उसे इज्जत से यहां की दो गज जमीन नसीब हो सके. 

पूरा परिवार है भारत का नागरिक 
85 वर्षीय महिला भानुमति बरोई कामरूप जिले के बोको इलाके की निवासी हैं. भानुमती का मायका बारपेटा जिले के जशेदारपम गांव में था, लेकिन बोको क्षेत्र के त्रिलोचन गांव के निवासी गोपाल बरोई से शादी के बाद वह बोको चली गई. उसके दो बेटे हैं. सीमा पुलिस द्वारा उस पर विदेशी नागरिक होने का इल्जाम लगाया गया है. ओल्डएज में होने वाली बीमारियां और एक पैर में फ्रैक्चर होने के कारण, बरोई अब सामान्य जीवन नहीं जी सकती है. उन्हें चलने-फिरने और अपने दैनिक क्रिया-क्रम के लिए भी किसी के सहारे की जरूरत पड़ती है. 

21 साल पहले भी साबित कर चुकी है अपनी नागरिकता 
लगभग आज से 21 साल पहले 1998 में भी पुलिस ने भानुमति के खिलाफ  ऐसा ही इल्जाम लगाया था कि वह विदेशी हैं. उस वक्त वह राज्य में एक विदेशी न्यायाधिकरण अदालत के सामने पेश हुई और 1965 और 1971 की मतदाता सूची सबूत के तौर पर जमा की, जिसमें उनके पिता का नाम दर्ज था. इसके साथ ही, उन्होंने एक भारतीय नागरिक होने के अपने दावे के समर्थन में पंचायत प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा किए थे. लगभग तीन साल मुकदमा चलने के बाद 2001 में नलबाड़ी में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल कोर्ट ने भानुमती को भारतीय नागरिक घोषित करते हुए उनके उपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया था. लेकिन, 21 साल बाद पुलिस ने फिर उस पर विदेशी होने का इल्जाम लगाते हुए उसके घर नोटिस भेजा है.

हिंदू बंगालियों को भाजपा निशाना बना रही हैः कांग्रेस 
अखिल असम बंगाली परिषद के कामरूप जिला अध्यक्ष संजय सरकार ने कहा कि भानुमति का परिवार बहुत खराब स्थिति में रहता है. विदेशी नागरिक का नोटिस मिलने के बाद उनकी पीड़ा और बढ़ गई है. उन्होंने यह भी दावा किया है कि भानुमती का नाम राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) में आया है और उन्होंने कई चुनावों में अपना वोट भी डाला है. इस बीच, असम कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने भानुमती के घर का दौरा कर भाजपा पर तंज कसा है. उन्होंने इल्जाम लगाया कि भाजपा ने हिंदू बंगालियों को नागरिकता देने का वादा किया था, लेकिन हकीकत में एनआरसी के नाम पर हिंदू बंगालियों को भाजपा निशाना बना रही है.
 

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