अगर बच्चे में दिखें ये संकेत तो हो जाएं सावधान! कहीं डिप्रेशन का तो नहीं है शिकार
Advertisement
trendingNow0/india/bihar-jharkhand/bihar1909111

अगर बच्चे में दिखें ये संकेत तो हो जाएं सावधान! कहीं डिप्रेशन का तो नहीं है शिकार

Bihar News : तनावपूर्ण परिवारिक माहौल खुद को अलग-थलग महसूस करना, स्कूल के काम का दबाव, परीक्षाओं का डर और सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल भी बच्चों को प्रभावित कर रहा है. इसके साथ ही बुलिंग और प्रताड़ना भी एक मुद्दा है.

अगर बच्चे में दिखें ये संकेत तो हो जाएं सावधान! कहीं डिप्रेशन का तो नहीं है शिकार

World Mental Health Day 2023: बच्चों में डिप्रेशन का पता लगाना महत्वपूर्ण है और हम यहां बता रहे हैं कि ऐसे लक्षण कैसे पहचाने जा सकते हैं. इससे पहले हमें समझना होगा कि डिप्रेशन क्यों होता है. आजकल की जीवनशैली और बदलते परिवेश के कारण, बच्चों के मानसिक दबाव बढ़ रहे हैं. इसके साथ ही, बच्चों का अत्यधिक मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल भी बढ़ गया है, जो उनको प्रभावित कर रहा है.

तनावपूर्ण परिवारिक माहौल खुद को अलग-थलग महसूस करना, स्कूल के काम का दबाव, परीक्षाओं का डर और सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल भी बच्चों को प्रभावित कर रहा है. इसके साथ ही बुलिंग और प्रताड़ना भी एक मुद्दा है. जिसके कारण बच्चे अधिक संकट में हो सकते हैं. इन सब कारणों से बच्चों में डिप्रेशन के लक्षण आ सकते हैं. 

इसके कुछ लक्षण हैं जिनके माध्यम से आप पहचान सकते हैं कि आपका बच्चा डिप्रेशन का शिकार हो सकता है.

  • रोज की गतिविधियों में रुचि की कमी: आपके बच्चे को खेलने या पढ़ाई में मन नहीं लगता हो सकता है.
  • निराशा और उदासी के भाव: वह हमेशा दुखी और निराश दिख सकता है.
  • थकान और ऊर्जा की कमी: वह स्कूल जाने में मना कर सकता है और थका रह सकता है.
  • नींद और भूख में बदलाव: उसकी नींद और भूख में परिवर्तन हो सकता है, जैसे की अधिक या कम नींद और भूख लगना.
  • क्रोध और रोने की प्रवृत्ति: वह छोटी बातों पर रो सकता है और गुस्सा आ सकता है.
  • सामाजिक प्रभावों से दूरी: वह दोस्तों से मिलने में रुचि नहीं रख सकता है.
  • ध्यान की कमी: उसकी स्कूल काम में मन नहीं लग सकता है.

साथ ही बता दें कि अगर आपका बच्चा इन लक्षणों में से कुछ को 2 सप्ताह से ज्यादा समय तक दिखाता है, तो उसे डिप्रेशन का संकेत हो सकता है. इस स्थिति से बच्चे को बाहर निकालने के लिए कुछ कदम उठा सकते हैं. उनकी बातों को ध्यान से सुनें और उनकी भावनाओं को समझने का प्रयास करें. उन्हें प्यार और सकारात्मकता का वातावरण प्रदान करें और उनकी उपलब्धियों की प्रशंसा करें. उनके लिए दैनिक रूटीन तैयार करें, जैसे कि नियमित रूप से खेलना, पढ़ना, और खाना. उन्हें परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताने के लिए प्रोत्साहित करें.
उन्हें व्यायाम, योग, और मेडिटेशन करने के लिए प्रोत्साहित करें. आवश्यकता हो तो डॉक्टर से परामर्श लें और उपचार शुरू करें. याद रखें, डिप्रेशन एक गंभीर समस्या हो सकती है और डॉक्टर की सलाह लेना बेहद महत्वपूर्ण है. इस तरह से हम बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित रूप से साझा कर सकते हैं और उन्हें सही मार्ग पर ले जा सकते हैं.

ये भी पढ़िए-  Pitru Paksha 2023: पितृ पक्ष में आखिर कौवे को ही क्यों कराया जाता है भोज, जानें महत्व और पितरों से जुड़ा संबंध?

Trending news